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वाराणसी: IIVR में भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों ने सीखीं ‘स्मार्ट खेती’ की बारीकियां

मेघालय और तमिलनाडु के छात्रों ने किया शैक्षणिक भ्रमण

​वाराणसी। शहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) में शुक्रवार को नवाचार और शिक्षा का अनूठा संगम देखने को मिला। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कृषि छात्रों ने आधुनिक खेती की तकनीकों को करीब से समझा।

​93 से अधिक छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा

​इस शैक्षणिक भ्रमण में मुख्य रूप से दो राज्यों के संस्थानों ने भाग लिया:

​मेघालय: कृषि महाविद्यालय, किर्डेमकुलई के छात्र।

​तमिलनाडु: महिला बागवानी कॉलेज और अनुसंधान संस्थान, तिरुचिरापल्ली की छात्राएं। कुल मिलाकर 93 से अधिक छात्रों ने संस्थान के तकनीकी अधिकारी अजय कुमार यादव के साथ प्रक्षेत्र का भ्रमण किया और अनुसंधान के जीवंत स्वरूप को देखा।

​‘बिमैटो’ और हाइड्रोपोनिक्स ने खींचा ध्यान

​भ्रमण के दौरान छात्रों के बीच सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र ‘बिमैटो’ (एक ही पौधे पर बैंगन और टमाटर) की ग्राफ्टिंग तकनीक रही। इसके अलावा छात्रों ने निम्नलिखित आधुनिक प्रणालियों को बारीकी से समझा:

हाइड्रोपोनिक्स: मिट्टी के बिना केवल पानी में खेती करने की विधि।​

पॉलीहाउस: नियंत्रित वातावरण में सब्जी उत्पादन की कार्यप्रणाली।

​कृषि में नवाचार को बताया अनिवार्य

​संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केशव कांत गौतम ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की समृद्धि के लिए कृषि में नवाचार अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से कृषि को केवल एक विषय नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय और सेवा के रूप में अपनाने का आह्वान किया। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार दुबे और डॉ. विकास सिंह ने छात्रों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और सब्जी अनुसंधान के क्षेत्र में करियर के अवसरों की जानकारी दी।

​इन प्रमुख इकाइयों का किया निरीक्षण

​छात्रों ने संस्थान की विभिन्न महत्वपूर्ण इकाइयों का दौरा कर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया:

​उन्नत प्रयोगशालाएं: ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर) और आणविक जैव प्रौद्योगिकी का अध्ययन।

​प्रायोगिक प्रक्षेत्र: उच्च पोषण वाली मिर्च, टमाटर और औषधीय गुणों वाली सब्जियों का अवलोकन।

जैविक खेती मॉडल: वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने और जैविक खादों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी।

​बीज प्रसंस्करण: उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के भंडारण और प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीक।

संस्थान के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में एक कुशल और तकनीक-संपन्न कार्यबल तैयार करना है, ताकि किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारा जा सके।

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