
मुंबई। सात बहनों और महज 80 रुपए से शुरू हुआ एक छोटा-सा प्रयास आज 45 हजार से अधिक महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की कहानी बन चुका है। श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की इसी यात्रा को बुधवार को मुंबई के सायन स्थित श्री षण्मुखानंद चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती ऑडिटोरियम में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज गोयल ने महिला कारीगरों के सामने रखा।

गोयल ने कहा कि 15 मार्च 1959 को शुरू हुआ लिज्जत का सफर सिर्फ पापड़ बनाने का कारोबार नहीं था, बल्कि महिलाओं को सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास था। वर्ष 1966 में केवीआईसी से ग्रामोद्योग की मान्यता मिलने के बाद संस्था की गतिविधियों को नई गति मिली। आज लिज्जत पापड़ की 83 शाखाओं के जरिए 16 राज्यों की 45 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। संस्था ने पापड़ से आगे बढ़ते हुए मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप जैसे उत्पादों में भी कदम रखा है। इसके उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण अफ्रीका समेत 30 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि गुणवत्ता, मेहनत और अनुशासन लिज्जत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में काम करने वाला उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “लिज्जत सिर्फ पापड़ नहीं बनाती, वह सम्मान, आत्मविश्वास और अवसर गूंथती है।”

कार्यक्रम में संस्था की प्रेसिडेंट स्वाति आर. पराडकर ने छह दशक से अधिक की यात्रा, महिला कारीगरों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।गोयल ने बताया कि देशभर में करीब 3 हजार खादी संस्थाओं से लगभग 5 लाख कारीगर जुड़े हैं, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। पिछले 12 वर्षों में खादी कारीगरों की मजदूरी में 275 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं, खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन करीब 1.25 लाख करोड़ और बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की जानकारी दी गई।



