Varanasi

वाराणसी पब्लिक स्कूल में डिजिटल माध्यम से जीवंत हुए संत रविदास के विचार; बच्चों ने समझी ‘बेगमपुरा’ की अवधारण

वाराणसी। केरावतपुर स्थित वाराणसी पब्लिक स्कूल में संत रविदास जयंती के उपलक्ष्य में विशेष शैक्षिक गतिविधियों का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं को संत रविदास जी के जीवन संघर्ष और उनके महान दार्शनिक विचारों पर आधारित विशेष चलचित्र दिखाए गए।

​आधुनिक तकनीक से पारंपरिक मूल्यों का संगम

​विद्यालय की इस अनूठी पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर संत रविदास जी द्वारा प्रतिपादित समानता, मानवता और सामाजिक न्याय के वास्तविक अर्थों से अवगत कराना था। दृश्य एवं श्रव्य (Audio-Visual) माध्यमों के प्रयोग ने बच्चों में विषय के प्रति जिज्ञासा जगाई, जिससे उन्होंने संत जी के आध्यात्मिक संदेशों को अत्यंत सहज रूप से ग्रहण किया।

​प्रमुख संदेश: जाति-पाति से ऊपर मानवता

​चलचित्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सीखा कि:

  • ​समानता का अधिकार: जन्म के आधार पर कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, कर्म ही मनुष्य की पहचान है।
  • ​बेगमपुरा समाज: एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना जहां न कोई दुखी हो, न किसी का शोषण हो और न ही कोई भेदभाव।
  • ​नैतिक उत्थान: कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों पर अडिग रहकर कैसे समाज को नई दिशा दी जा सकती है।

​चारित्रिक विकास पर जोर

​विद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों के नैतिक एवं चारित्रिक विकास को बल मिलता है। बच्चों के भीतर सम्मान, करुणा, सहिष्णुता और एकता जैसे मानवीय मूल्यों का बीजारोपण करना ही इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य रहा।

​इस प्रेरणादायक कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने न केवल भारतीय संत परंपरा के गौरवशाली इतिहास को जाना, बल्कि समाज में सद्भाव और समानता बनाए रखने का संकल्प भी लिया।

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