प्लास्टिक बैन बेअसर!
वसई-विरार में खुलेआम इस्तेमाल

आवाज Nation/मुंबई
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानी जाने वाली प्लास्टिक पर राज्य सरकार द्वारा वर्षों पहले प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन वसई-विरार शहर में इसका असर अब भी अधूरा दिखाई दे रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक थैलियों और अन्य उत्पादों का खुलेआम उपयोग जारी है। मानसून की दस्तक से पहले नालों और सड़कों के किनारे जमा प्लास्टिक कचरा अब नागरिकों की चिंता का बड़ा कारण बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्लास्टिक कचरे को नहीं हटाया गया तो बारिश के दौरान नाले जाम हो सकते हैं और शहर के कई इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। हर वर्ष भारी बारिश के दौरान वसई-विरार के निचले इलाके पानी में डूब जाते हैं और विशेषज्ञ इसके पीछे नालों में फंसे प्लास्टिक कचरे को भी प्रमुख वजह मानते हैं।
शुरुआती सख्ती के बाद धीमी पड़ गई कार्रवाई
प्लास्टिक प्रतिबंध लागू होने के बाद शुरुआती दौर में वसई-विरार शहर महानगर पालिका ने व्यापक स्तर पर छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई की थी। हालांकि समय के साथ यह अभियान धीमा पड़ता गया। पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि वर्तमान में कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जिसके चलते दुकानदारों और विक्रेताओं में नियमों का डर कम हो गया है।
नालों में प्लास्टिक के ढेर, नागरिकों में बढ़ी चिंता
शहर के कई हिस्सों में नालों के भीतर और आसपास प्लास्टिक कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। नागरिकों ने मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले विशेष अभियान चलाकर नालों की सफाई की जाए और प्लास्टिक कचरे को पूरी तरह हटाया जाए। उनका कहना है कि लापरवाही बरती गई तो इस वर्ष भी शहर को बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
29 हजार किलो से ज्यादा प्लास्टिक जब्त करने का दावा
वसई-विरार महानगरपालिका का दावा है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। सार्वजनिक स्वच्छता विभाग के सहायक आयुक्त जितेंद्र नाईक के अनुसार पिछले डेढ़ वर्ष में 2,823 दुकानों और गोदामों की जांच की गई। इनमें 190 स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया गया, जहां से 29,143 किलोग्राम प्लास्टिक जब्त किया गया। साथ ही संबंधित लोगों पर 7.07 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मवेशियों की सेहत पर भी खतरा
प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग केवल जल निकासी व्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि आवारा पशुओं के लिए भी खतरा बन रहा है। चारे की कमी के कारण पशु अक्सर कचरे के ढेरों में भोजन तलाशते हैं। कई बार खाद्य पदार्थ प्लास्टिक की थैलियों में फेंके जाते हैं, जिन्हें खाते समय पशु प्लास्टिक भी निगल लेते हैं। पशु प्रेमियों का कहना है कि इससे मवेशियों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।
“युद्धस्तर पर चले सफाई अभियान”
समाजसेवक अमित दुबे ने प्रशासन से प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और मानसून से पहले नालों व सड़कों के किनारे जमा प्लास्टिक कचरे की युद्धस्तर पर सफाई कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वच्छ और सुरक्षित वसई-विरार के लिए प्लास्टिक मुक्त अभियान को फिर से प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है।
“प्लास्टिक पर प्रतिबंध कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। मानसून से पहले ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जलभराव और पर्यावरणीय संकट दोनों बढ़ सकते हैं।” — अखिलेश दुबेस्थानीय नागरिक।


