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काशी की मिसाल: मकर संक्रांति पर सरकारी पैसे से नहीं, बल्कि अफसरों और महापौर की जेब से श्रद्धालुओं को मिलेगी गर्मागर्म चाय

पूरी व्यवस्था का खर्च नगर निगम के बजट से नहीं, बल्कि महापौर और अधिकारियों के निजी सहयोग से

वाराणसी | 10 जनवरी, 2026 धर्मनगरी काशी में इस बार मकर संक्रांति पर सेवा भाव की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिलेगी। कड़ाके की ठंड में गंगा स्नान के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत इस बार गर्मागर्म चाय से किया जाएगा। खास बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था का खर्च नगर निगम के बजट से नहीं, बल्कि महापौर और अधिकारियों के निजी सहयोग से उठाया जाएगा।

महापौर ने की 5000 रुपये से शुरुआत

सिगरा स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में शनिवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी ने इस नेक पहल की नींव रखी। उन्होंने अपने व्यक्तिगत कोष से 5000 रुपये की सहयोग राशि देकर शुरुआत की। महापौर की इस अपील पर नगर निगम के अधिकारियों ने भी उत्साह दिखाया और अपने वेतन व व्यक्तिगत बचत से इस पुनीत कार्य में योगदान देने का संकल्प लिया।

इन घाटों पर रहेगी चाय और अलाव की व्यवस्था

ठंड के प्रकोप को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम ने विशेष इंतजाम किए हैं:

  • प्रमुख सेवा स्थल: राजघाट, दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं को चाय पिलाई जाएगी।

  • अलाव का इंतजाम: घाटों के साथ-साथ उन रास्तों पर भी भारी संख्या में अलाव जलाए जाएंगे जहाँ से श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक होता है।

  • अस्थाई चेंजिंग रूम: महिला श्रद्धालुओं की गरिमा और सुविधा के लिए घाटों पर पर्याप्त संख्या में अस्थाई कपड़े बदलने के कमरे (चेंजिंग रूम) बनाए जाएंगे।

सफाई और प्रकाश व्यवस्था पर जोर

महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मकर संक्रांति पर काशी आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

  • सभी घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।

  • बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए हर घाट पर टीम तैनात की गई है।

  • घाटों पर अलाव की लकड़ी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

“मकर संक्रांति पर पूरी दुनिया से लोग काशी आते हैं। हमारा उद्देश्य है कि उन्हें यहां न केवल स्वच्छता मिले, बल्कि काशी की पारंपरिक मेहमाननवाजी और सेवा भाव का भी अनुभव हो। इसीलिए हमने व्यक्तिगत स्तर पर यह प्रयास शुरू किया है।”

— अशोक कुमार तिवारी, महापौर

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