यूपी बनेगा फूड प्रोसेसिंग हब : 15 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, 140 करोड़ के निवेश से खुलेंगे रोजगार के द्वार
15 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित अप्रेजल समिति की बैठक में 15 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में लगभग 140 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
निवेशकों की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के लागू होने से प्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बन गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस नीति के तहत मिलने वाले अनुदान और सुविधाओं के बारे में लोगों को जागरूक करें ताकि गांव-गांव तक औद्योगिक समन्वय पहुँच सके।
इन 14 जिलों में लगेंगे नए प्रोजेक्ट
बैठक में कुल 16 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 15 को मंजूरी दी गई। ये प्रोजेक्ट्स प्रदेश के विभिन्न जनपदों में स्थापित होंगे:
-
कानपुर नगर (02), अमेठी (02)
-
कानपुर देहात, हाथरस, एटा, शाहजहांपुर, शामली, प्रयागराज, गोरखपुर, जालौन, कुशीनगर, बाराबंकी, वाराणसी और मुरादाबाद (01-01 प्रोजेक्ट)
विविध सेक्टर्स में होगा विकास
मंजूर किए गए 15 प्रोजेक्ट्स में केवल पारंपरिक खेती ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और विविध सेक्टर्स को शामिल किया गया है:
-
सोलर प्रोजेक्ट्स (06)
-
डेयरी प्रोडक्ट्स, रेडी टू कुक, रेडी टू ईट (01-01)
-
कुक्कुट आहार, फ्रोजन फ्रूट एवं वेजिटेबल (01-01)
-
लिक्विड ग्लूकोज, टोमैटो सॉस और ट्रांसपोर्ट सब्सिडी (01-01)
-
इसके अलावा सहारनपुर के मिल्क, चीज और बटर से संबंधित एक बड़े प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों और युवाओं को सीधा लाभ
उप मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
-
किसानों के लिए: उनके उत्पादों (फल, सब्जी, अनाज, दूध, मशरूम, शहद आदि) का उचित मूल्य मिलेगा और बर्बादी कम होगी।
-
युवाओं के लिए: स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण इकाइयों में रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
-
उद्यमियों के लिए: नई नीति के तहत फल-सब्जी प्रसंस्करण, बेकरी, स्नैक्स और मछली चारा निर्माण जैसी इकाइयों के लिए भारी अनुदान का प्रावधान है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
अपर मुख्य सचिव (उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण) बी.एल. मीना की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि इन मंजूर प्रस्तावों को अब अंतिम अनुमोदन के लिए राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी (SLEC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन इकाइयों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए ताकि प्रदेश में ‘फार्म टू फोक’ (Farm to Fork) की अवधारणा साकार हो सके।



