
वाराणसी। (16 जनवरी, 2026) भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी में बिहार के भागलपुर और वैशाली जिले के 51 प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित पांच-दिवसीय ‘सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीक’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय को दोगुना करना और उन्हें उद्यमी बनाना था।

वैज्ञानिकों ने सिखाए उन्नत खेती के गुर
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में ‘आत्मा’ (ATMA) के सहयोग से आए किसानों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान दिया गया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नीरज सिंह के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की:
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मशरूम उत्पादन: डॉ. सुदर्शन मौर्य ने मशरूम को व्यवसाय के रूप में अपनाने और स्पॉन निर्माण की तकनीक सिखाई।
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जैविक खेती: डॉ. सिद्धार्थ कुमार सिंह ने सब्जियों के जैविक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य पर जोर दिया।
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ग्राफ्टिंग तकनीक: डॉ. अनंत बहादुर सिंह ने ग्राफ्टिंग (कलम बांधना) के माध्यम से बेहतर उत्पादन की बारीकियां बताईं।
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एकीकृत कृषि प्रणाली: डॉ. आर के दुबे ने बागवानी आधारित एकीकृत खेती का मॉडल समझाया।
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ग्रीष्मकालीन सब्जियां: डॉ. त्रिभुवन चौबे ने गर्मी के मौसम में अधिक पैदावार देने वाली किस्मों की जानकारी दी।
पोमैटो और ब्रिमैटो देख हैरान हुए किसान
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को IIVR की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रायोगिक खेतों का भ्रमण कराया गया। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण ब्रिमैटो (बैंगन+टमाटर) और पोमैटो (आलू+टमाटर) के साथ-साथ ग्राफ्टेड मिर्च के पौधे रहे। इसके अलावा किसानों ने हाइड्रोपोनिक्स (बिना मिट्टी की खेती), स्वचालित पॉलीहाउस और वर्मीकम्पोस्ट निर्माण की आधुनिक विधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
बीज किट और प्रमाण पत्र के साथ विदाई
समापन सत्र में डॉ. नीरज सिंह ने सभी 51 किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए एक ‘विशेष प्रोत्साहन किट’ भी दी गई, जिसमें किचन गार्डन पैकेट, लोबिया की ‘काशी निधि’ और भिंडी की ‘काशी प्रगति’ किस्म के उन्नत बीज शामिल थे।
डॉ. सिंह ने कहा कि यहाँ से सीखी गई तकनीकें बिहार के इन जिलों में कृषि नवाचार को नई दिशा देंगी और किसान पारंपरिक खेती से ऊपर उठकर वैज्ञानिक पद्धति अपनाएंगे।




