वाराणसी : बिहार के किसानों को ‘स्मार्ट’ बनाएगी काशी की तकनीक: IIVR वाराणसी में 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू
खेतों में अब उगेगा ब्रिमैटो और पोमैटो
वाराणसी। बिहार के किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। भागलपुर और वैशाली जिले के 50 प्रगतिशील किसान ‘सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीक’ सीखने काशी पहुंचे हैं। ‘आत्मा’ (ATMA) द्वारा प्रायोजित यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 जनवरी तक चलेगा।
खेतों में अब उगेगा ‘ब्रिमैटो’ और ‘पोमैटो’
प्रशिक्षण के पहले ही दिन किसानों ने संस्थान की लैब और खेतों में आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों को देखा। इसमें सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहे ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधे:
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ब्रिमैटो: एक ही पौधे में बैंगन और टमाटर।
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पोमैटो: एक ही पौधे में आलू और टमाटर।
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रोग-प्रतिरोधी किस्में: मिर्च और टमाटर की ऐसी प्रजातियां जिन पर बीमारियों का असर नहीं होता।
बिना मिट्टी की खेती और कमाई के नए तरीके
संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को भविष्य की खेती के मॉडल दिखाए, जिनमें शामिल हैं:
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हाइड्रोपोनिक्स: बिना मिट्टी के केवल पानी के सहारे सब्जी उगाना।
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संरक्षित खेती: पॉलीहाउस के अंदर जलवायु को कंट्रोल कर बेमौसम सब्जियां उगाना।
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अतिरिक्त आय: मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और जैविक खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनाने की सस्ती तकनीक।
विशेषज्ञों की सलाह: फसल विविधीकरण है जरूरी
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह और डॉ. हरे कृष्णा ने किसानों को बाजार की रणनीति समझाई। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय सब्जियों के उत्पादन और उनके प्रसंस्करण (Processing) पर ध्यान दें, ताकि बाजार में बेहतर दाम मिल सकें।
प्रशिक्षण का लक्ष्य
इस 5 दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य बिहार के किसानों को बीज बोने से लेकर फसल की ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक की पूरी चेन समझाना है। इससे न केवल उनकी लागत कम होगी, बल्कि उपज की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी।



